मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, बालोद
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बालोद
बालोद जिला प्रशासन द्वारा एक अग्रणी पहल।
शासन को डिजिटाइज़ करता है और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकारी योजनाओं को एकीकृत करता है।
डिजिटल इंडिया इनिशिएटिव और 'सबका साथ , सबका विकास, सबका विश्वास' के सिद्धांतों के साथ संरेखित करता है
निर्माण बालोद पोर्टल जिला प्रशासन की एक अनोखी पहल है, जिसका उद्देश्य जिले का डिजिटलीकरण और सशक्तिकरण करना है।यह पोर्टल जिले कि जनसंख्या को जोड़कर, योजना निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करता है और उन्हें वास्तविक समय में डेटा तक पहुंच प्रदान करता है। साथ ही, यह पोर्टल निम्न सुविधाएं प्रदान करता है: परियोजनाओं पर निगरानी: प्रारंभिक प्रस्ताव से लेकर स्वीकृतियों, कार्यान्वयन और अंतिम रिपोर्टिंग तक परियोजनाओं की निगरानी करता है। जियो-टैग्ड दस्तावेजीकरण: फ़ील्ड टीम प्रत्येक चरण में जियो-टैग्ड फोटो और इंजीनियरों की टिप्पणियां अपलोड करती है। विज़ुअल स्टेटस इंडिकेटर: GIS मानचित्रों पर रंग कोड (जैसे, प्रस्तावित के लिए पीला, चल रहे के लिए हरा, और पूर्ण के लिए नीला) के माध्यम से परियोजनाओं को दर्शाया जाता है। केंद्रीकृत डैशबोर्ड: विभिन्न विभागों से डेटा को एकत्रित करता है, जिससे मैन्युअल हस्तक्षेप कम होता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया सुगम होती है। यह पोर्टल डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने, प्रक्रियाओं को तकनीक के माध्यम से डिजिटल करने, पारदर्शिता बढ़ाने और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद करता है।
तान्दुला नदी के तट पर बसा यह शहर, 1 जनवरी 2012 को दुर्ग जिले से अलग होकर छत्तीसगढ़ का 27वां जिला बना। कृषि, खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण यह जिला अपनी समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है।
कृषि, खनिज, वन एवं जल — चारों संसाधनों का अनूठा संगम
बालोद शहर तान्दुला नदी के तट पर बसा है, जो आधिकारिक रूप से 1 जनवरी 2012 से जिला मुख्यालय का दर्जा प्राप्त कर चुका है। जिला मुख्यालय बालोद, तान्दुला (आदमाबाद) डैम के समीप है, जो सूखा एवं तान्दुला नदी पर 1912 में विकसित किया गया था। बालोद जिला धान, चना, गन्ना एवं गेहूं जैसे उपज के लिए जाना जाता है। जिले के तान्दुला, खरखरा एवं गोंदली डैम कृषि कार्य में सिंचाई के श्रोत हैं।